अभी कुछ दिनों पहले ही इस फील्ड में कदम रखा है। समझ नहीं आ रहा है कि शुरुवात कहाँ से करूं। लेकिन करना तो पड़ेगा ही, दूसरा विकल्प नहीं हैं। बाते तो बहुत सारी है कहने को लेकिन देखते है कोई सुनने को तैयार है की नहीं। कुछ किस्से है, कुछ कहनियाँ हैं ,कुछ हादसे है, कुछ सीख हैं , अनुभव है लेकिन सुनने वाला कोई नहीं है। कुछ पश्ताप हैं तो कुछ गुस्सा है। गुस्सा खुद से है,समाज से है , परिवार से, देश से है , हर उस चीज़ से है जो मुझे कुछ कहने से रोकती हैं। इसलिए मैंने अपने Blog का नाम "मुझे कुछ कहना है " दिया है।
Welcom sir
ReplyDeleteWelcome ji
ReplyDeleteGo ahead!!
ReplyDelete