क्या सही है क्या गलत किसको पता हैं??
वैसे तो समय लगातार बदलता रहता हैं, लेकिन उसका असर हम पर पड़ना बहुत देर से शुरू होता है। कोई भी चीज जब अपने शैशव कल में होती है, तो उस पर सभी को लाढ़ प्यार आता है। किन्तु जैसे ही वो वस्तु या जीव व्यस्क होकर अपना विस्तार करता है, तो उसमे खूबी या ख़ामी समझ मे आने लगती हैं। समाज का निर्माण बहुत ही जटिल प्रकिया हैं। इसमें सजीव-निर्जीव, अच्छे-बुरे सभी का बराबर योगदान होता हैं। लेकिन कभी-कभी ताकतवर इंसान या जीव अपने आप को समाज से बढ़कर समझने लगता है। उसी समय कुछ न कुछ अनर्थ होना शुरू होता है। सबसे बड़ी ताकत कोई होती है तो वो समर्थन और सच्चाई की होती है. आपके पास जितना अधिक जन समर्थन होगा और आप जितना अधिक सच्चाई से काम करोगे उतना ही आप ताकतवर महसूस करोगे। ताकत से आत्मविश्वास पैदा होता है , आत्मविश्वास से फैसले लेने की हिम्मत आती है। लेकिन फैसले लेने की समझ ज्ञान और अनुभव से आती है. अब ये ज्ञान तो अर्जित किया जा सकता है घर में बैठकर लेकिन अनुभव प्राप्त करने के लिए आपको अपने कम्फर्ट जोन से बहार निकलना पड़ेगा। अब आप देखिये कैसे एक चीज दूसरे से जुडी हुई है। कैसे आप जो प्राप्त करते है उसमे कितने लोगो का सपोर्ट होता है , कितना परिश्रम होता है, त्याग होता है। इस यात्रा में बहुत सी बातें सही लगती है , बहुत सी बातें गलत भी लगती है। लेकिन इसका फैसला कौन करेगा?? क्या सही है क्या गलत किसको पता हैं??
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